कृषि ऑर्डीनैंसों पर राजनीति करने की बजाय पंजाब के किसानों के साथ खड़ो ; कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अकालियों को कहा कहा, ‘केंद्र जानबुझ कर राज्यों के अधिकारों में दख़ल दे रहा’.

कृषि ऑर्डीनैंसों पर राजनीति करने की बजाय पंजाब के किसानों के साथ खड़ो ; कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अकालियों को कहा
कहा, ‘केंद्र जानबुझ कर राज्यों के अधिकारों में दख़ल दे रहा’
कोविड -19 के संकट के दौरान मंत्रीमंडल में कोई फेरबदल नहीं
विनी महाजन की मुख्य सचिव के तौर पर नियुक्ति उसकी काबलीयत और योग्यता के आधार पर की
करतारपुर गलियारा स्वास्थ्य सुरक्षा एहतियात की सख्ती से पालना के साथ खोलने के लिए तैयार हूं
सारे चुनावी वायदे पूरी करने के लिए अपनी सरकार की वचनबद्धता दोहराई
चंडीगढ़, 29 जून:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से हाल ही में जारी किसान विरोधी कृषि आर्डीनैंसों के मामले पर राज्य सरकार के विरोध का पूर्ण सहयोग न देकर अकालियों ने पंजाबी किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल के प्रधान और लोक सभा मैंबर सुखबीर सिंह बादल को अपनी पत्नी की केंद्रीय कैबिनेट में कुर्सी बचाने और भाजपा के साथ अपनी हिस्सेदारी रिश्तों को बनाऐ रखने की बजाय अपने ज़मिर की आवाज़ सुननी चाहिए।
आज यहाँ प्रैस कान्फ्ऱेंस को संबोधन करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल हमेशा ही संघीय ढांचे की सच्ची भावना के अंतर्गत राज्यों के स्वामित्व और अधिक अधिकार देने का हामी रहा है। उन्होंने कहा कि हालाँकि प्रांतीय भाजपा की तो यह मजबूरी बनती है कि वह केंद्र में अपनी पार्टी की तरफ से लिए फ़ैसले का विरोध न करे परंतु अकालियों को तो चाहिए कि राज्य के किसानों को बचाने के लिए इन किसान विरोधी आर्डीनैंसों को रद्द करते हुए इसके विरोध में उतरें।
एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आर्डीनैंस शांता कुमार कमेटी का ही नतीजा है जिसने न्युनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) को ख़त्म करने के साथ एफ.सी.आई. को भंग करने की सिफ़ारिश की है। उन्होंने कहा कि एक बार अगर यह आर्डीनैंस संसद ने पास कर दिए तो भविष्य में एम.एस.पी. के जारी रहने की कोई गारंटी नहीं जैसे कि सुखबीर बादल दावा कर रहे हैं।
इस बात की वकालत करते हुये कि पंजाब के हितों से सम्बन्धित ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने एक बात सांझा की कि मुख्यमंत्री के तौर पर उनके पहले कार्यकाल के दौरान जब उन्होंने प्रस्तावित सतुलज यमुना लिंक नहर के द्वारा पंजाब का पानी पड़ोसी राज्यों में जाने से बचाने के लिए पानियों का समझौता रद्द किया था तो उनकी अपनी पार्टी हाई कमांड ने उन (मुख्य मंत्री) को सम्मन किया था।
उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह हमेशा अपनी कुर्सी की बजाय अपने राज्य के हितों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने अकालियों को कहा कि वह भी इसी नाजुक मुद्दे पर उसी भावना का प्रदर्शन करें जिससे उनके संकुचित राजसी हितों की बजाय किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।
बहबल कलाँ गोलीकांड में विशेष जांच टीम (एस.आई.टी.) की चल रही पड़ताल के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच अभी जारी है और इस पड़ाव पर किसी को भी दोषी नहीं घोषित किया जा सकता।
केंद्र की तरफ से पंजाब को बिजली एक्ट -2003 का संशोधित मसौदा भेजने के सम्बन्ध में एक अन्य सवाल का जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने संघीय ढांचे पर एक और हल्ला बोला है जिसके द्वारा राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उपभोक्ताओं के विशेष वर्ग चाहे वह घरेलू, किसान, कारोबारी या औद्योगिक हों, को रियायतें देने का अधिकार क्षेत्र राज्य का होता है परन्तु इस सम्बन्ध में केंद्र राज्य पर धौंस नहीं जमा सकता। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संविधान के अंतर्गत राज्यों को मिली शक्तियों को जानबुझ कर ह्रास करने पर तुला हुआ है।
मंत्रीमंडल में फेरबदल की संभावना को रद्द करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कोविड -19 के कठिन समय में उनके मंत्री ख़ास कर स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू, मैडीकल शिक्षा और अनुसंधान मंत्री ओ.पी. सोनी और ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस के इस कठिन पड़ाव पर फेरबदल की कोई ज़रूरत नहीं लगती क्योंकि इस महामारी के खि़लाफ़ जंग जितना उनकी सबसे अधिक प्राथमिकता है और यदि फेरबदल की ज़रूरत हुई तो इसको बाद में विचारा जायेगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू को कोई नयी जि़म्मेदारी दी जा सकती है तो इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सिद्धू को राज्य या केंद्र में कोई जि़म्मेदारी देने का अंतिम फ़ैसला पार्टी हाई कमांड द्वारा लिया जाना है।
पाकिस्तान सरकार की तरफ से करतारपुर गलियारा फिर खोलने की पेशकश करने के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को इस संबंधी कोई ऐतराज़ नहीं परन्तु अंतिम फ़ैसला भारत सरकार द्वारा लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र की तरफ से इस सम्बन्धी पंजाब सरकार से कोई सलाह माँगी जाती है तो वह यकीनी तौर पर कोविड -19 के दरमियान स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों और सामाजिक दूरी की सख्ती से पालना के साथ रास्ता खोलने के लिए कहेंगे।
विनी महाजन की मुख्य सचिव के तौर पर नियुक्ति के बारे सवाल पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी काबलीयत, योग्यता और राज्य और केंद्र के प्रशासन में विशाल तजुर्बा और महारत के अलावा राज्य सरकार की नीतियों और प्रोग्रामों के प्रभावी अमल के लिए लंबे समय के लिए इस पद की निरंतरता को कायम रखने को केवल आधार मानते हुए नियुक्ति की गई है।
नव -नियुक्त मुख्य सचिव के पति डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता जो डी.जी.पी के तौर पर केंद्र में इम्पैनलड हो चुके हैं, केंद्रीय डैपूटेशन पर जाने के बारे एक अन्य सवाल में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुप्ता पंजाब में ही रहेंगे क्योंकि जो उन्होंने 2500 गैंगस्टरों को प्रभावहीन करने के अलावा विभिन्न आतंकवादी गिरोहों को काबू करने में शानदार कारगुज़ारी निभाई है।
माफिया -राज संबंधी पूछे गये सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने साफ़ शब्दों में कहा कि सिविल और पुलिस प्रशासन दोनों शराब और रेत की ग़ैर-कानूनी बेच को रोकने के लिए पूरी मुशतैदी के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप में कहा कि केबल और ट्रांसपोर्ट में एकाधिकार को ख़त्म करने के लिए यदि कोई इन दोनों क्षेत्रों में नया व्यापार शुरू करना चाहता है तो उसका स्वागत है परन्तु वह किसी भी चल रहे कारोबार को बंद करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। उन्होंने ऐसी ग़ैर-कानूनी गतिविधियों में सम्मिलन वाले कई व्यक्तियों की सूची सांझी की जिनके खि़लाफ़ कार्यवाही की जा रही है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ज़ोर देते हुये कहा कि आवास निर्माण और शहरी विकास मंत्री सुखबिन्दर सिंह सरकारिया के सम्मिलन वाले मंत्रियों के समूह की तरफ से शराब के ग़ैर-कानूनी व्यापार के खि़लाफ़ और शिकंजा कसने और उत्पादकों, थोक विक्रेताओं और परचून विक्रेताओं के बीच गठजोड़ को तोडऩे के लिए विभिन्न पहलूओं पर काम किया जा रहा है। इस समूह की तरफ से जल्दी ही अपनी रिपोर्ट सौंपी जायेगी।
खालिस्तान के मुद्दे पर श्री अकाल तख़्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के बयान के बारे में अपनी प्रतिक्रिया प्रकट करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी खालिस्तान नहीं चाहता यहाँ तक कि वह (मुख्यमंत्री) भी नहीं चाहते। उन्होंने सवाल किया कि कोई भी सिख, जो मुल्क में कहीं भी अपना कारोबार कर रहे हों और ख़ुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा है तो वह खालिस्तान की माँग क्यों करेगा। उन्होंने कहा कि सिखज़ फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू जैसे लोग लोगों की धार्मिक भावनाओं को भडक़ा कर पैसा कमाने में लगे हुए हैं जोकि बहुत मन्दभागा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पन्नू का अमरीका और पंजाब में कभी भी कोई आधार नहीं रहा जिसकी मिसाल रिफरैंडम 2020 को स्वीकृति न मिलने के कारणइसको आगे टालने से मिलती है।
कोविड -19 के कारण आर्थिक मंदी के दरमियान मोंटेक सिंह आहलूवालीया के नेतृत्व वाली कमेटी की सिफारिशों के अनुसार राज्य की आर्थिकता को फिर से पैरों पर खड़ा करने के मसले का जि़क्र करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि श्री आहलूवालिया की तरफ से अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है और अंतिम रिपोर्ट आहलूवालीया की तरफ से बनाऐ छह माहिर ग्रुपों की सिफारिशों का अध्ययन करने के उपरांत उचित समय पर सौंपी जायेगी।
राज्य सभा सदस्यों प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलों द्वारा उनकी सरकार की कारगुज़ारी से सम्बन्धित बयानों के बारे टिप्पणी करने के लिए पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि निराधार बयान देने की जगह उनको अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने पिछले लोक सभा मतदान में कांग्रेस के हक में स्पष्ट फ़ैसला दिया है जो पंजाब सरकार की नीतियाँ और प्रोग्रामों के प्रति लोगों के भरोसे पर विश्वास का सबूत है।
साल 2017 के विधान सभा मतदान के दौरान उनकी पार्टी की तरफ से किये वायदों को पूरा करने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह निजी तौर पर लोगों के साथ किये हरेक वायदे की समीक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने मंत्रीमंडल की पहली ही मीटिंग में 50 ऐसे चुनावी वायदे पूरे कर दिए थे जिनका कोई वित्तीय बोझ नहीं था। अपनी वचनबद्धता को दोहराते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सभी वायदे हूबहू लागू किये जाएंगे।
स्मार्ट फ़ोन बाँटने के एक बड़े चुनावी वायदे संबंधी पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि पंजाब सरकार को पहले ही मोबाइल कंपनी लावा को आर्डर दिया हुआ जिसने हमें यह बताया कि 50,000 मोबाइल तैयार हैं और बाकियों की सप्लाई जुलाई में की जायेगी। उन्होंने कहा कि चाहे लावा एक भारतीय कंपनी है परन्तु फिर भी अंतिम फ़ैसला इस कंपनी में चीन के सम्मिलन और भारतीय और चीन की हिस्सेदारी का पता लगाने के बाद लिया जायेगा।

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