केंद्र की २५८वी मासिक बैठक में श्री नील रंजन के गिटार ने छेड़े दिलों के तार

Chandigarh-11/5/19,प्राचीन कला केंद्र की २५८ वि मासिक बैठक में दिल्ली से आये हवाईन गिटार वादक  श्री नील रंजन ने  हवाईन गिटार की  मधुर प्रस्तुति दे कर दर्शकों की खूब वाहवाही  बटोरी इस कार्यक्रम का आयोजन  केंद्र के ऍम एल कोसेर सभागार सायं ६रू३० बजे किया गया  इस अवसर पर केंद्र के सचिव श्री सजल कोसेर  भी उपस्थित  थे    आज की इस प्रस्तुति में श्री नील रंजन  ने  अद्भुत  प्रस्तुति देकर दर्शकों का  बाहर मनोरंजन किया

दिल्ली विश्वविद्याला से संगीत शिरोमणि की डिग्री प्राप्त  नील रंजन ने  देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन करके सफलता के नए आयाम बनाये हैं नील रन्जन ने पारम्प्रिक वादन शैली  के साथ साथ अपनी  एक विशेश वादन शैली  से दर्शको  के दिल पे एक गहरी गहरी छाप छोडते हैं

नील रंजन  को १९९९ में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की तरफ से   स्टेट म्यूजिक कम्पटीशन के  विजेता होने के साथ साथ  उत्तर प्रदेश के गवर्नर की तरफ से स्टेट स्कालरशिप  भी प्रदानं किया गया था ाल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के ा ग्रेड आर्टिस्ट्स नील रंजन  ने सार्क   सम्मलेन में भी  हिस्सा लेकर भारत का गौरव बढ़ाया है

आज के कार्यक्रम की शरुआत  नील रंजन ने राग मधुवंती में निबद्ध आलाप से की उपरांत उन्होंने  तीन ताल में निबद्ध  मसीतखानी एवं रजतखानी  गत का सूंदर प्रदर्शन किया
इसके  पश्चात्  नील रंजन ने   एक सूंदर  एवं प्रसिद्द ठुमरी का प्रदर्शन किया  जिसे फिल्मों में भी  गाया गया है  ये मशहूर ठुमरी की  बंदिश मोहे  पनघट पे नन्द लाल छेड़  गयो रे जिसे अपने वाद्य में नील रंजन  ने बहुत खूबसूरती से पेश किया इन प्रस्तुतियों के माध्यम से नील रंजन ने    रागों की शुद्धता से प्रस्तुतिकरण एवं तंत्रकारी अंगों पर अपनी महारथ को बखूबी दर्शाया।

कार्यक्रम का समापन  श्री नील रंजन ने अपने गुरु  द्वारा  रचित एक धुन  से किया  जो की राग भैरवी में निबद्ध थी   पंडित  नील रंजन के साथ  तबले पर  चंडीगढ़ के मशहूर तबला वादक आविर्भाव वर्मा ने बखूबी संगत की

कार्यक्रम के अंत में   केंद्र के सचिव श्री सजल कोसेर द्वारा   कलाकारों को सम्मानित किया गया

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