अलविदा तनाव शिविर : पांचवां दिन स्वयंकोसृष्टिकासबसेमहानकलाकारसमझो- बीकेपूनम

चंडीगढ़, 5 अक्टूबर, 2018

 

 

 

 

आनन्दितजीवनजीनेकेलिएखुदसेप्यारकरो, खुदकोकभीरिजेक्टमतकरो।आजअपनेविषयकोस्पष्टकरतेहुएब्रह्माकुमारीपूनमबहनजीनेयेबातकही।उन्होंनेकहाकिहमेशासोचोकिमैंइससृष्टिपरसबसेमहानकलाकारहूंमेरेजैसाइसपूरीदुनियामेंकोईऔरनही।

          बहनआगेकहतेहैंअपनेपार्टकोसंतुष्टहोकरबजानाहै।भगवाननेमुझेइसवर्ल्डड्रामामेंभेजाहैतोमेरेअंदरजरूरकुछविशेषताहैं।जोपार्टमुझेमिलाहैवोसबसेअच्छाहै।यहबातलिखकरघरमेलटकादो।

खुदकेलिएभीकभीतालियांबजाएंरातकोसोनेसेपहलेडायरीमें 108 बारयहस्वमानलिखोकि मैंविशेषहूं, महानआत्माहूं, साधारणनहीहूँ।जैसासोचेंगेवैसाबननेलगेंगे।एकदिनमहानहीबनजाएंगे।दुसरोकीजीतपर, लोगोकीमहानतापरतोबहुततालियांबजाईअबखुदकेलिएतालियांबजानासीखलो।

*ज्यादासोचनेऔरनकारात्मकसोचनेसे

ब्रेनकेकईसेंटर्सब्लॉक्होजातेहैं।इससेडिपरेशन, तनावयाअन्यकईभयंकरबीमारियांहोतीजारहीहैं।*

 

स्वार्थीमतबनोआकांक्षीमनमनुष्यकोभिखारीबनादेताहै।इच्छाकभीअच्छाबननेनहीदेगीइसलिएकहाजाताइच्छामात्रमअविद्या।

दूसरोंकेलिएजीनासीखो।स्वार्थीमतबनो।दूसरोंकेलिएजोजीनेवालेहोते हैंउनकातनावकास्तरजीरोहोताहै।

 

हरेककेपार्टकोदेखकरभीवाहवाहकरनाहैजोजैसाकररहाहैयहउसव्यक्तिकापार्टहैइसमेंहमेंतनावग्रस्तहोनेकीजरूरतनही। जैसेहमनेदुखीरहनेकीआदतडाललीथीअबसदाखुशऔरशांतरहनेकीआदतडालनीहै।

 

दुनियामेहरकिसीकाअपनामूलस्वभावहोताहै

जैसेसूरजकास्वभावतपतदेना, जलकाशीतलतादेना।ऐसेहीहममनुष्यआत्माओंकास्वभावभीशांतस्वरूपआनन्दस्वरूपऔरप्रेमस्वरूपहै।

 

जैसाअंदरमनमेविचारचलताहैवैसीहीतरंगेआपकेआसपासफैलतीहैं।आपकेनजदीकरहनेवालीवस्तुओंयाव्यक्तियोंपरउसकाऐसाहीप्रभावपड़ताहै।

 

जोआपचाहतेहोवोहीसबमेंबाँटो, अगरखुशीचाहतेहोतोखुशीबाँटो, प्रेमचाहतेहोतोप्रेमबाँटो।क्योंकिजोआपदेतेहोउसीकाकईगुणाहोकरवापिसफलमिलताहै।

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