खुले में साप्ताहिक नमाज के बहाने शहर में फैलाई जा रही साम्प्रदायिक नफरत किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गुरूग्राम 01 दिसम्बर 2021

खुले में साप्ताहिक नमाज के बहाने शहर में फैलाई जा रही साम्प्रदायिक नफरत किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन व राज्य सरकार शहर के आपसी भाईचारे वह सौहार्द को बिगाड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

उक्त मांग आज जनवादी महिला समिति, सीटू, लोकतांत्रिक मंच, गुड़गाँव नागरिक एकता मंच, डीवाईएफआई, एआईएलयू, सर्व कर्मचारी संघ और गुरूग्राम के प्रबुद्ध नागरिकों की ओर से मंडल कमिशनर कार्यालय पर आयोजित धरने के माध्यम से उठाई गई। धरने की अध्यक्षता जनवादी महिला समिति की जिला अध्यक्ष भारती, जनवादी नौजवान सभा के रोहिन गर्ग, सैंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन के जिला अध्यक्ष कंवर लाल यादव व ऑल इंडिया लायर्स यूनियन के नेता विनोद भारद्वाज ने संयुक्त रूप से की। धरने का संचालन लोकतांत्रिक मंच के संयोजक मेजर एस एल प्रजापति ने किया।

धरने को सम्बोधित करते हुए सीटू के राज्य उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह मलिक, राज्यसभा के पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब, जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव सविता, राज्य अध्यक्ष उषा सरोहा, गुड़गाँव नागरिक एकता मंच के नेता अल्ताफ अहमद, सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव राम निवास ठाकरान, नगर पालिका कर्मचारी संघ के नेता राम सिंह, नरेश मलकट, ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के राज्य अध्यक्ष देवी राम, मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सलीम, बलबीर मलिक, हरि सिंह चौहान, तनवीर अहमद, माइकल सैनी, तौफीक अहमद, मनीष मक्कड़, श्रीमती मलीहा, अदीति गौतम, रेहडी पटरी यूनियन के नेता राजेंद्र सरोहा, योगेश कुमार, आशा वर्कर्स यूनियन के नेता मीरा, रानी, चौकीदार यूनियन के नेता राज सिंह, रामकुमार, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलवान दहिया आदि ने कहा कि हरियाणा में और विशेषकर गुरुग्राम में धार्मिक अल्पसंख्यकों व दलितों पर निरंतर हमले बढ़ रहे हैं। भाजपा और आरएसएस से संबंधित संगठन लगातार योजनाबद्ध ढंग से देश की सांझी संस्कृति, सांझी विरासत और साम्प्रदायिक सद्भाव पर हमले कर रहे हैं। गुरुग्राम जोकि मिनी इंडिया के नाम से प्रसिद्ध है, जहां भिन्न-भिन्न धर्मों, जातियों और राज्यों के लोग मिलजुल कर रह रहे हैं, वहां पर लोगों की आपसी एकता और भाईचारे को बिगाड़ने की साजिशें हो रही हैं। 4 जुलाई को गुरुग्राम जिला के पटौदी में आरएसएस के संगठनों द्वारा महापंचायत का आयोजन किया गया जिसमें खुलकर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर उगला गया। विभिन्न संगठनों द्वारा कार्रवाई के लिए आवेदन दिए जाने के बावजूद भी इस महापंचायत के मुख्य वक्ता सूरजपाल अम्मू और आयोजक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद लगभग तीन महीने से गुरुग्राम में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा खुले में साप्ताहिक नमाज अदा करने को मुद्दा बनाया जा रहा है। आरएसएस के विभिन्न संगठनों द्वारा खुले में नमाज अदा करने के खिलाफ जगह-जगह विरोध किया जा रहा है। खुले में नमाज अदा करने वालों को पाकिस्तान जाने की नसीहत दी जा रही है। अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए पिछले दो तीन सालों से भाजपा ने खुले में नमाज को एक राजनीतिक मुद्दा बना रखा है। पुलिस, प्रशासन व दोनों समुदायों की सहमति से 2018 में कुछ स्थान नमाज के लिए चिन्हित किए गए थे, मगर अब प्रशासन ने आठ स्थानों से नमाज की स्वीकृति वापिस ले ली। जिन लोगों ने अपनी जगह नमाज अदा करने वालों को देने की कोशिश की वहां उनके खिलाफ माहौल तैयार किया जा रहा है। यह बेहद भयानक स्थिति है।

यही स्थिति देश के अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रही है।मानवाधिकार समूहों की हालिया रिपोर्टों के मुताबिक साल 2021 के पहले नौ महीनों में ईसाई समुदायों और उनके धार्मिक पूजा स्थलों पर 300 हमले किए गए हैं। पीड़ितों में से कई आदिवासी और दलित समुदायों से हैं। प्रार्थना सभाओं को नियमित रूप से रोका जा रहा है और धर्मांतरण रोकने के नाम पर इन सभाओं में शामिल होने वालों को पीटा जा रहा है। मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाया जाता है और उनके खिलाफ ‘गोरक्षा’ और ‘लव जिहाद’ के नाम पर लिंचिंग, पुलिस हत्याओं, झूठी गिरफ्तारी और भीड़ द्वारा हिंसा के मामले जारी हैं।

त्रिपुरा में भी विश्व हिन्दू परिषद के गुंडों ने अल्पसंख्यक समुदायों पर हमला किया, कुछ मस्जिदों में तोड़फोड़ भी की गई। इन हमलों की खबर प्रसारित करने वालों पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मुस्लिम रेहड़ी-पटरी वालों को धमकी दी जा रही है और उन्हें अपनी आजीविका चलाने से रोक दिया गया है। असम में, दशकों से भूमि पर खेती करने वाले गरीब किसान परिवारों को केवल इसलिए बेरहमी से बेदखल किया गया क्योंकि वे मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) का इस्तेमाल आम बात हो गई है।

अल्पसंख्यकों पर ये हमले भारत के संविधान पर हमला है। ये जहरीले अभियान देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं और इनके परिणाम भंयकर हो सकते हैं।

धरने के बाद तहसीलदार श्री दर्पण सिंह कंबोज के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा गया।इस ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ चलाए जा रहे इस जहरीले अभियान को रोका जाए तथा इस तरह की सांप्रदायिक गतिविधियों में शामिल अपराधियों को बख्शा ना जाए तथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। पीड़ितों और उनका समर्थन करने वाले लोगों की सुरक्षा की जाए तथा झूठे मामलों और कठोर धाराओं के तहत गिरफ्तारियां बंद की जाएं। ज्ञापन में आगे कहा गया कि सांप्रदायिक व जातीय विद्वेष कि भावना पर आधारित लामबंदी पर रोक लगाई जाए और देश के अमन चैन और सांप्रदायिक सद्भाव को किसी भी सूरत में बिगड़ने ना दिया जाए तथा गुरूग्राम में मुस्लिमों को नमाज पढ़ने के लिए प्रशासन द्वारा आवंटित जगहों को उनके लिए सुनिश्चित किया जाए।

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