गुरु रविदास जी लोकवाणी में लिखते थे-कटारिया.

अक्टूबर 03: श्री गुरु रविदास सभा, पिंजौर का प्रतिनिधि मंडल आज रविवार को अम्बाला लोकसभा के सांसद रतन लाल कटारिया से मिलाl बातचीत के दौरान कटारिया ने कहा कि गुरु रविदास जी लोकवाणी में लिखते थे, इसलिए जनमानस पर उनके लेखन का सहज प्रभाव पड़ता था। उनकी रचनाओं में हमेशा मानवीय एकता व समानता पर बल दिया जाता था। वे मानते थे कि जब तक हमारा अंतर्मन पवित्र नहीं होगा, तब तक हमें ईश्वर का सानिध्य नहीं मिल सकता है। दूसरी ओर, यदि हमारा ध्यान कहीं और लगा रहेगा, तो हमारा मुख्य कर्म भी बाधित होगा तथा हमें कभी-भी लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो सकती है। जो बातें उन्होंने स्वयं पर आजमाई, उन्हें ही रचनाओं के माध्यम से आम जन को बताया।
रविदास भक्ति आंदोलन के एक ऐसे संत हैं, जो जीवन भर श्रम की महत्ता पर जोर देते रहे। इनकी सर्वाधिक ऊर्जा अपने समय के पाखंड से लड़ने में खर्च हुई, क्योंकि उन्हें पता था कि इसके बगैर समता, समानता व सहअस्तित्व की भावना को अर्जित नहीं किया जा सकता। महात्मा गांधी अपने धर्म का पालन करते थे, लेकिन वे कर्मकांड करने की बजाय आत्मा की शुद्धता पर अधिक जोर देते थे। संत रविदास की तरह गांधी कर्म व श्रम की महत्ता पर जोर देते थे।
कटारिया ने बातचीत के दौंरान बताया कि डेरा बल्लां के प्रमुख व विश्व मे संत गुरु रविदास जी की वाणी का प्रसार करने वाले संत श्री निरंजन दास जी से भी लगातार आशीर्वाद प्राप्त होता हैं व उनके सानिध्य में हम गुरु रविदास जी के विचारों को जन मानस तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगे l
उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर को सेक्टर-15, पंचकूला के रविदास भवन में उनकी माता परवारी देवी जी की बरसी पर होने वाली गुरु रविदास भजन संध्या में डेरा सिरसगढ़ के संत मंदीप दास जी भी शिरकत करने वाले हैं l इस दौंरान कटारिया जी ने श्री गुरु रविदास सभा, बिटना कालोनी, पिंजौर को MPLAD से 11 लाख रु. अनुदान देने का भी आश्वासन दिया l

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