शहीदों के बच्चों को भी नहीं बख्शा भाजपा की सरकार ने: योगेश्वर शर्मा

पंचकूला,5 दिसंबर। आम आदमी पार्टी ने रक्षामंत्री निर्मला सीता रमन के उस फैसले की कटु आलोचना की है जिसमें उन्होंने देश के लिए जान गंवाने वाले जवानों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा प्रतिपूर्ति को कम करने का जो फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि हर वर्ग को धोखा देने वाली भाजपा सरकार ने ऐसा करके देश के लिए शहीद होने वाले सैना के जवानों के बच्चों तक को भी नहीं बख्शा। आप का कहना है कि इससे ज्यादा दुखदायी बात और क्या हो सकती है कि सेना के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा ने अब उनको मिलने वाली सुविधाओं पर भी कैंची चलानी शुरु कर दी है। जबकि कुछ समय पहले चुनाव जीतने के लिए सेना की सर्जीकल स्ट्राईक को भी कैश करवाने से इस पार्टी ने कोई परहेज नहीं किया था।
आम आदमी पार्टी के जिला प्रधान योगेश्वर शर्मा ने यहां जारी एक प्रेस ब्यान में नौसेना प्रमुख सुनील लांबा द्वारा रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे गये पत्र का हवाला  दिया है। जिसमें उन्होंने मंत्री से गुजारिश की है कि देश के लिए जान गंवाने वाले जवानों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा प्रतिपूर्ति को कम करने का जो फैसला किया गया है उसको वापस ले लिया जाए। एडमिरल लांबा ने सरकार के उस फैसले की समीक्षा की मांग की है, जिसमें शहीदों या कार्रवाई के दौरान दिव्यांग हुए सैनिकों के बच्चों की शैक्षणिक सहायता राशि अधिकतम प्रतिमाह 10,000 रुपये तय की गई है। योगेश्वर शर्मा का कहना  है कि इससे ज्यादा दुखदायी बात और क्या हो सकती है कि एक महिला होने के बावजूद निर्मला सीता रमन शहीद हुए या दिवयांग हुए सैनिकों के परिवारों की हालत नहीं समझ पा रही हैं।
आप के जिला प्रधान योगेशवर शर्मा ने आगे कहा कि इस तरह के फैसले देश के जवानों की शहादत का अपमान हैं। उन्होंने कहा कि जिस जवान ने अपने प्राण तक देश की सुरक्षा के लिए न्यौछावर कर दिए, आज उसी जवान के बच्चों को केंद्र सरकार के इस फैसले की वजह से शिक्षा के लिए तरसना पडेगा।
जबकि देश को ऐसे जवानों के बच्चों की शिक्षा का भार खुद केंद्र सरकार को उठाना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा अवसर उनके बच्चो को मिलना चाहिए ताकि देश के जवानों को अपने परिवार की चिंता न रहे और उनका परिवार आगे भी देश सेवा में तत्पर रहे। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार और रक्षामंत्री से यह मांग करती है  कि सरकार को उनके भत्ते में कटौती करने की बजाय बढ़ाना चाहिए। तथा  सरकार को जल्द से जल्द इस काले कानून वाले फैसले को वापिस लेना चाहिए।
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