निरंकारी महिला सन्त समागम आयोजित

चंडीगढ़, 31 जुलाई, 2016: श्री मोहिन्दर सिंह जी संयोजक चंडीगढ़ ब्रांच ने संत निरंकारी सत्संग भवन सैक्टर 30 में बताया कि संत निरंकारी मिशन द्वारा एक विशेष महिला संत समागम का आयोजन किया गया। समागम का मुख्य उद्देश्य महिला भक्तों विशेषकर नौज़वान महिलाओं का उत्साह बढ़ाना तथा मिशन की विचारधारा से अवगत कराना था।

उन्होंने आगे बताया कि समागम का आयोजन सन्त निरंकारी मण्डल के द्वारा दिल्ली में किया गया जिसमें दिल्ली के सभी 29 सैक्टरों से मिशन की हज़ारों महिलाओं ने भाग लिया। समागम की अध्यक्षता मिशन की महान प्रचारक तथा गुरु परिवार की सदस्य पूज्य राज कुमारी (राज मामी) जी ने की। समागम में केन्द्रीय योजना एवं सलाहाकार बोर्ड, मण्डल की कार्यकारिणी समिति के अन्य सदस्य एवं बड़ी संख्या में अन्य महापुरुष भी उपस्थित रहे और भाग लेने वालों का उत्साह बढ़ाया।

प्रचार विभाग द्वारा वक्ताओं और गीतकारों के लिए विशेष विषय निधार्रित किये गये जिनमें गुरु निराकार का साकार रुप होता है, मानवता के जीवन्त शिक्षक थे – बाबा हरदेव सिंह जी महाराज, पूर्ण भक्ति नहीं होगी यदि प्यार नहीं विश्वास नहीं, सत्संग ही विचारों का रुपांतरण करती है, सम्मिलित थे। दिल्ली का यह महिला समागम देश भर में 9 जुलाई को सेक्टर स्तर तथा 16 और 23 जुलाई को जोन स्तर पर हुए महिला समागमों की शृंखला का शिखर रहा।

इस अवसर पर श्रीमती राज कुमारी जी ने कहा कि जब हम अपने आस-पास देखते हैं तो संसार में नफ़रत, ईर्ष्या तथा हिंसा नज़र आती है। अमन और शांति को पाने का एक मात्र मार्ग है ब्रह्मज्ञान जो प्रेम, करुणा, सहनशीलता जैसे दिव्य गुणों का स्रोत है।

पूज्य मामी जी ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति केवल पूर्ण सद्गुरु से ही हो सकती है। सद्गुरु निराकार का साकार रूप होता है। यदि हम सद्गुरु की पूजा कर रहे हैं तो हम निरंकार-परमात्मा को पूज रहे हैं। सद्गुरु माता सविन्दर हरदेव जी महाराज आज हमें सेवा, सत्संग और सिमरन से जुड़ने की प्रेरणा दे रहे हैं जो हमें प्रभु-परमात्मा से जोड़े रखते हैं और प्रेम, आदर-भाव और एकता के भाव उजागर करते हैं।

मिशन के पूर्व सद्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज को याद करते हुए पूज्य मामी जी ने कहा कि सद्गुरु माता जी ने कहा है कि हम बाबा जी को सही मायनों में श्रद्धांजली तभी दे सकते हैं जब हम उनकी शिक्षाओं पर चलकर मिशन को उन ऊँचाईयों पर ले जाएं जहाँ बाबा जी ले जाना चाहते थे।

समागम में भाग लेने वाली अनेकों महिलाओं भक्तों ने गीत, प्रवचन तथा स्किट द्वारा अपने भाव दिये गये विषयों पर वयक्त किए। समागम में एक प्रशनोत्तरी का भी आयोजन किया गया जिसमें दिल्ली के 8 सैक्टरों से आई 50 से भी अधिक महिलाओं ने भाग लिया। वक्ताओं में बहन बिन्दिया छाबड़ा जी ने कहा कि सद्गुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज ने जो प्यार विश्व भर में बाँटा, अपने भक्तों को भी उसी प्रेम को बाँटने का संदेश दिया। उन्होनंे कहा कि बाबा जी ने सदैव मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी और उन्हीं मूल्यों को हमने अपने परिवार में भी अपनाना है। बिन्दिया जी ने कहा कि एक नारी ही परिवार को जोड़ सकती है और तोड़ भी सकती है। यदि हम महिलाएँ गुरु की शिक्षाओं को अपनाकर जिसका आधार ब्रह्मज्ञान है अपने परिवार और बच्चों को दें तो परिवार जुड़े रहेंगे।

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