देश में आतंकवाद के खात्मे के लिए उधम सिंह जैसे जज्बे की जरूरत- वीरेश शांडिल्य

पंचकूला-शहीद उधम सिंह हों या भगत राजगुरु सुखदेव,सराभा हो या आज़ाद या फिर लाला लाजपत राय सहित तमाम शहीदो के चित्र भारतीय नोटों पर छपे ये शब्द एंटी टेररिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहे l आज फ्रंट ने सैंकड़ों सदस्यों ने शांडिल्य के नेत्र्तव में शहीद उधम सिंह के शहीदी दिवस पर आतंकवाद का पुतला जलाया l शांडिल्य ने कहा कि शहीदो की बदौलत आज हिंदुस्तान है उन्होंने कहा की इस देश से आतंकवाद को जड़ मूल से मिटाने के लिये हम सभी देश वासियों देश की युवा पीढ़ी को उधम सिंह जैसी सोच रखनी होगी नहीं तो इस देश में बुरहान वानी जैसे आतंकवादी पैदा होते रहेंगे वीरेश शांडिल्य ने कहा कि वो आज़ादी और भारत माँ पर कोई आंच नहीं आने देंगे उनके लिए भारत की आन बान शान से बड़ा कुछ नहीं उन्होंने कहा देश सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है साथ ही उन्होंने कहा कश्मीर में सेना को फ्री हैण्ड दिया जाये और सेना पर पथराव करने वालो को जिन्दा रहने का कोई हक़ नहीं ।

एंटी टेररिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि क्रान्तिकारी सरदार ऊधम सिंह की निशानियों को केंद्र सरकार लंदन से लाकर पंजाब स्थित ऊधम सिंह के गाँव सुनाम में म्यूजियम बनाकर रखा जाये। फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य के मुताबिक ऊधम सिंह की कुछ अहम निशानियाँ आज भी लंदन के स्काटलैंड यार्ड स्थित एशियन म्यूजियम में रखी हुई हैं I इनमें उनकी रिवाल्वर, कोट-पैंट, टोपी और उनके द्वारा लिखे कई पत्र शामिल हैंl उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिख कर मांग की है कि इन तमाम निशानियों को केंद्र सरकार लंदन से लेकर सुनाम में ऊधम सिंह के गाँव सुनाम में म्यूजियम बनाकर रखे। शांडिल्य के मुताबिक शहीदों की कुर्बानीयों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। म्यूजियम निर्माण कराने में अगर सरकार फ्रंट से कोई मदद मांगेगी तो फ्रंट हमेशा शहीदों के लिए सरकार के साथ खड़ा रहेंगे l उन्होंने कहा उधम सिंह की निशानियाँ ब्रिटेन से वापिस लाने के लिए फ्रंट सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे l जानकारी हो कि क्रान्तिकारी सरदार ऊधम सिंह ने जलियांवाला बाग हत्या कांड के दौरान पंजाब के गर्वनर जनरल रहे माइकल ओ डायर को लन्दन में जाकर गोली मारी थी और खुद को कानून के हवाले कर दिया था। उन्हें हत्या का दोषी ठहराते हुए 31 जुलाई 1940 को लदन के पेंटनविले जेल में फाँसी पर चढ़ा दिया गया था । इस मौके पर राममेहर शर्मा,कुलवंत सिंह मानकपुर, केसर सिंह, अंकुर अग्रवाल, सुरेश शर्मा, तरसेम सैनी, सुदेश जैन, प्रेम सैनी, लखविंदर सिंह ,जसमीत जस्सी, गुरचरण सिंह,बिट्टू जट्ट,चाहत चौहान,राकेश शांडिल्य,इरफ़ान,महबूब, देवेंद्र सेठी, सुभाष मेहता सहित भारी तादाद में फ्रंट के सदस्य माजूद थे ।

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