योग में नियम का महत्व

Panchkula-29/6/16-वर्ष का प्रत्येक दिन एक विशेष शक्ति द्वारा संचालित होता है। यदि किसी साधक की साधना या अभ्यास एक दिन के लिए भी छूटता है तो वह उस दिन की शक्ति से वंचित रह जाता है और उस कारण पूरे वर्ष की साधना प्रभावित होती है क्योंकि ब्रह्माण्ड में यदि एक भी वस्तु या पदार्थ अपनी व्यवस्था के दायरे में न हो तो उसका प्रभाव सृष्टि के प्रत्येक अंग पर दिखाई देता है – हमारा शरीर, पृथ्वी अन्य गृह, तारा मंडल आदि सभी पर। यही कारण है कि योग में नियम तथा दैनिक अभ्यास पर ज़ोर दिया जाता है।
प्रत्येक शक्ति का एक दिन निर्धारित है। तंत्र और योग में कोई आडंबर या कोई कर्मकाण्ड विधि नहीं होती है केवल शक्ति की साधना की जाती है। दिन की तरह शक्ति के प्रत्येक स्वरुप का एक नाम भी है, किन्तु उनके नाम लेने से पूर्व कुछ विशेष साधनाओं द्वारा शरीर में उनको धारण करने की क्षमता उत्पन्न की जाती है। गुरु के सानिध्य में ध्यान करते समय साधकों को आरम्भ में सूर्य, चन्द्र आदि शक्तियों के कुछ सूक्ष्म अनुभव हो जाते हैं। लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि यह शक्तियाँ कहाँ से आती हैं और इनका क्या तातपर्य है ?
ध्यान आश्रम में अनेक साधकों ने सूर्य देव के दर्शन किये हैं लेकिन सूर्य के बारे में ऐसा क्या ख़ास है ? यदि आप सूर्योदय और सूर्यास्त के समय, सूर्य की छवि को देखते हुए तथा अपने मणिपूरक चक्र पर ध्यान रखते हुए, ‘राम’ मंत्र का जाप करेंगे तो इस अभ्यास के द्वारा महीने भर में ही आपका स्वरुप बदलने लगता है और शरीर में एक विशेष प्रकार की आभा उत्पन्न होगी। ( किसी भी प्रकार के योग अभ्यास के लिए ‘गुरु’ का होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि एक साधक की क्षमतानुसार ही योग अभ्यास का ज्ञान गुरु द्वारा दिया जाता है ।
सूर्य की तरह ही चन्द्रमाँ भी एक शक्ति है । हालाँकि वह सूर्य के ही प्रकाश को प्रतिबिंबित करता है लेकिन उसी प्रकाश के आकर्षण से पूर्णिमा की रात को वह समुद्री ज्वार तथा पृथ्वी की सतह को आकर्षित करने में सक्षम है। इतना ही नहीं, पूर्णिमा की रात को पशु हिंसक हो जाते हैं, मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति और भी अजीबोगरीब रूप से व्यवहार करने लगते हैं तथा दुर्घटनाओं और झगड़ों में भी वृद्धि हो जाती है। यह इन शक्तियों के कुछ बुनियादी लक्षण हैं जो उन्हें एक दुसरे से भिन्न करती हैं किन्तु वास्तव में वे क्या हैं यह एक अनुभव का विषय है जिसे योग और सनातन क्रिया के आत्म अभ्यास द्वारा अनुभव किया जा सकता है।
कुछ ऐसी शक्तियाँ हैं जिनको आप नहीं देख सकते और कुछ ऐसी शक्तियाँ हैं जिनके माध्यम से आप सूक्ष्म अनुभव कर सकते हैं और उनके प्रभाव को भी महसूस कर सकते हैं, तब वह आपका निजी अनुभव बन जाता है। चन्द्रमाँ की यह विशेषता है कि वह बहुत ही शांत लगता है किन्तु वह सूर्य से भी अधिक परिवर्तनशील है। सूर्य, जो चन्द्र की शक्ति का स्त्रोत है, उसे सीधे नहीं देखा जा सकता, किन्तु जब गुरु के सानिध्य में चन्द्र संयम किया जाता है तो सूर्य की आभा तथा उसके सभी मंत्र साक्षात हो जाते हैं।

योगी अश्विनी

Share