जब तक सामाजिक समानता नहीं आती तब तक सम्पूर्ण आजादी भी नहीं मिलेगी।प्रो0 सोलंकी

चण्डीगढ, 14 अप्रैल। जब तक सामाजिक समानता नहीं आती तब तक सम्पूर्ण आजादी भी नहीं मिलेगी। इसलिए देष को उस सामाजिक समानता और समरसता के लिए संकल्पबद्ध होना होगा जिसका षंखनाद भारत रत्न डा0 भीमराव अम्बेडकर ने किया था। यह बात हरियाणा व पंजाब केे राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने आज स्थानीय सेक्टर-37 स्थित अम्बेडकर भवन में डा0 भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती समारोह में अपने सम्बोधन में कही। इससे पहले उन्होंने डा0 भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। समारोह का आयोजन डा0 अम्बेडकर स्टडी सर्कल ने किया था।
प्रो0 सोलंकी ने कहा कि 1947 में हमें जो आजादी मिली वह राजनैतिक आजादी थी। उससे आगे सामाजिक स्वतंत्रता मिलनी थी जिसके लिए डा0 अम्बेडकर बहुत पहले से संघर्ष कर रहे थे। इस सामाजिक स्वतंत्रता को उन्हांेने भारत के संविधान की रचना करते समय केन्द्र में रखा है। इसलिए संविधान के माध्यम से डा0 अम्बेडकर ने हमें जो कुछ दिया है जब तक हम उसे हूबहू लागू नहीं करते तब तक सम्पूर्ण स्वतंत्रता भी नहीं मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि भारत के लिए जो महापुरूष महत्वपूर्ण हैं उनमें भी सर्वाधिक महत्वपूर्ण महात्मा गांधी और डा0 अम्बेडकर हैं। गांधी जी राष्ट्रपिता बने क्योंकि उन्होंने देष को आजाद कराया। लेकिन आजादी के बाद देष को कैसा बनना है, यह हमें अम्बेडकर ने बताया। उन्होंने कहा कि गांधी जी और अम्बेडकर पालिटिषियन नहीं थे, क्योंकि पालिटिषियन केवल पांच साल की सोचता है, वे तो स्टेटसमेन थे जो आने वाली पीढी और उससे भी आगे आने वाली पीढियों के बारे में सोचता है। आज भी देष को ऐसे ही दूरदर्षी महामानवों की जरूरत है।
राज्यपाल ने कहा कि आजादी के इतने सालों बाद आज फिर डा0 भीमराव अम्बेडकर का महत्व हमें अधिक समझ में आ रहा है। केन्द्र सरकार व राज्य सरकारें भी उनके दर्षन और उनकी देन के प्रति संजीदा हैं। इसका कारण यही है कि अम्बेडकर के बिना आधुनिक भारत अधूरा है। वे ऐसे महापुरूष थे जो अपने लिए नहीं जिए बल्कि देष व समाज के लिए जिए। अपने लिए कुछ नहीं मांगा और बड़े पदों पर रहतंे हुए किसी से भेदभाव भी नहीं किया। बल्कि सदियों से चले आ रहे भेदभाव के प्रति भारतीय समाज को झकझोरने के लिए अपने निधन से कुछ मास पूर्व बौद्ध धर्म अपनाकर धर्मपरिवर्तन का तमाचा जड़ा। बौद्ध धर्म अपनाने के पीछे उनका मकसद केवल भारतीय समाज को भेदभाव के प्रति सजग करना था।
इससे पहले चण्डीगढ के मेयर अरूण सूद ने अपने सम्बोधन में कहा कि नगर निगम हर साल अम्बेडकर जयंती धूमधाम से मनाएगी। उन्होंने बताया कि आज भी नगर में 24 स्थानों पर डा0 अम्बेडकर की जयंती मनाई जा रही है। डा0 अम्बेडकर स्टडी सर्कल के महासचिव अनिल कुमार लम्धारिया ने संस्था के कार्यक्रमों और उपलब्धियों की जानकारी दी और वंचित समाज की मांगें रखते हुए मांगपत्र राज्यपाल व चण्डीगढ के प्रषासक को सौंपा। सेवानिवृत आई0ए0एस0 अधिकारी आर0 एल0 कल्सिया और जे0 आर0 कुंडल ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर डा0 अम्बेडकर स्टडी सर्कल के अध्यक्ष इन्द्र राज, सेवानिवृत आई0ए0एस0 अधिकारी बाबूलाल आदि उपस्थित थे।

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