सेनाली नाट्टा के गायन की प्रभावषाली प्रस्तुति

सेनाली नाट्टा के गायन की प्रभावषाली प्रस्तुति

Chandigarh-9/4/16-प्राचीन कला केन्द्र की 221वीं बैठक में आज यहां प्राचीन कला केन्द्र के भास्कर राव सभागार में दिल्ली से आई युवा षास्त्रीय गायिका सोनाली नाट्टा ने षास्त्रीय गायन की मधुर प्रस्तुति देकर चंडीगढ़ के संगीत प्रेमीयों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सोनाली नाट्टा कोलकता के एक सांगीतिक परिवार से है और इन्होंने गुरू मसकूर अली खां के अलावा आषीप चक्रवर्ती एवं पद्मश्री सुमित्रा गुहा जी से संगीत की षिक्षा ली है और इन्होंने प्राचीन कला केन्द्र से संगीत विषारद की षिक्षा ली है। इसके अलावा सोनाली ने कोलकता के प्रसिद्ध चैनल से संगीत सपर्धा ;इतो नोई षुद्धो गान द्ध भी जीती है। इन्होंने टीवी पर बहुत से संगीत कार्यक्रम किए हैं। इसके अलावा सोनाली को गज़ल,भजन एवं लाईट म्यूज़िक गाने में भी महारथ हासिल है।
आज के कार्यक्रम की षुरूआत सोनाली ने राग यमन से की। इसमें आलाप के बाद उन्होंने विलम्बित एक ताल में निबद्ध रचना ‘‘सुमिरन तोरा तू करीम,रहीम रहिमन’’ से ही दर्षकों को अपने साथ जोड़कर अपनी सधी हुई गायकी का परिचय दिया। इसके पष्चात छोटा ख्याल तीन ताल में निबद्ध रचना ‘‘मोरी गागर भरन न देत’’। इसके पष्चात उन्होंने द्रुत एक ताल में ‘‘विनती मानो पिया मोरी’’ पेष करके दर्षकों की खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम का समापन राग भैरवी में निबद्ध भजन‘‘तुम आ जाना भगवान’’ से किया। अपनी मधुर और सधी हुई आवाज से सोनाली ने दर्षकों की खूब वाहवाही लूटी।
इनके साथ तबले पर मिहीर नाट्टा,हारमोनियम पर राकेष ने बखूबी संगत की। केन्द्र की रजिस्ट्ार डाॅ.षोभा कौसर ने कलाकारों को पुप्प देकर सम्मानित किया।

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