तकनीकी रूप से अग्रणी भारत ही समृद्ध, सशक्त व जग-सिरमौर भारत बन सकता है-प्रो0 कप्तान सिंह सोलंकी.

चण्डीगढ़, 9 अप्रैल। तकनीकी रूप से अग्रणी भारत ही समृद्ध, सशक्त व जग-सिरमौर भारत बन सकता है। इसमें भी आधुनिक सूचना व संचार प्रौद्यौगिकी का विकास व विस्तार सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यह बात हरियाणा, पंजाब के राज्यपाल व चण्डीगढ के प्रशासक प्रो0 कप्तान सिंह सोलंकी ने आज सेक्टर 30 स्थित केन्द्रीय वैज्ञानिक उपकरण अनुसंधान संस्थान में ‘‘डिजीटल इंडिया के लिए आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय गोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए कही। गोष्ठी का आयोजन इलैक्ट्रानिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन अभियांत्रिकी संस्थान ने किया है। इस अवसर पर राज्यपाल ने डिजीटल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और स्मारिका का विमोचन भी किया। उन्होंने डी0आर0डी0ओ0, हैदराबाद में वैज्ञानिक के0वी0 पी0 वसंथा रायडू को आर0सी0 बर्मन अवार्ड से सम्मानित किया।
प्रो0 सोलंकी ने आगे कहा कि 21वीं सदी में तकनीक व नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाए बिना हम विष्व में देष का झंडा बुलंद नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि इस सदी में भारत अपने गौरव और गरिमा को फिर प्राप्त करेगा। इसके आसार दिखाई दे रहे हैं। आज हम मेक इन इंडिया के माध्यम से विश्वभर की जरूरत का सामान अपने देश में बनाने के लिए अग्रसर हैं। लेकिन मेक इन इंडिया भी डिजीटल इंडिया के बिना सफल नहीं हो सकता। अतः देश की 67 प्रतिशत युवा आबादी को तकनीकी व व्यावसायिक रूप से दक्ष करना होगा जो सही मायने में देश की शक्ति बनकर उभर रही है।
राज्यपाल ने कहा कि देश के ये युवा आज विश्व के सब देशों में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं। प्रधानमंत्री जिस भी देश में जाते हैं उनके कार्यक्रमों में भाग लेने वाले भारतीय मूल के लागों की बड़ी भीड़ होती है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि भारतीय मूल के इतने लोग विदेशों में हों। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत विश्वगुरू बनेगा इसकी घोषणा महापुरूषों ने पहले ही कर दी थी। स्वामी विवेकानन्द ने विश्व का इतिहास पढकर भविष्यवाणी की थी कि 17वीं शताब्दी इंग्लैंड की थी, 18वीं फ्रांस की थी, 19वीं शताब्दी जर्मनी की व 20वीं अमेरिका की है, लेकिन 21वीं शताब्दी भारत की होगी।
उन्होंने कहा कि महर्षि अरविन्द ने भी कहा था 1836 के बाद पराधीन भारत में बड़ा परिवर्तन होगा। 1836 में ठाकुर रामकृष्ण परमहंस का जन्म हुआ था और इसके बाद 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हुआ व लंबे संघर्ष के बाद 1947 देश आजाद हुआ। महर्षि अरविन्द ने यह परिवर्तन काल 175 सालों का बताया था। यह 2011 में पूरा हो चुका है और 2011 के बाद से भारत में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।
इससे पहले केन्द्रीय वैज्ञानिक उपकरण अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो0 आर0 के0 सिन्हा ने भी विचार रखे। इलैक्ट्रानिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन अभियांत्रिकी संस्थान की अध्यक्षा श्रीमती स्मृति डागौर ने संस्थान के कार्यक्रमों और उपलब्धियों की जानकारी दी। गोष्ठी के चेयरमेन श्री एस0के0 अंगरा ने सबका स्वागत किया और प्रो0 प्रदीप प्रभाकर ने धन्यवाद किया।

6 Attachments

Share