पंचकूला जिला को आगामी 15 अप्रैल तक पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त करना-उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़

पंचकूला, 1 मार्च उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़ ने कहा कि पंचकूला जिला को आगामी 15 अप्रैल तक पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त करना है। इसके लिए गांवों में एक जनआंदोलन चलाया जाए तथा ग्रामीणों के सहयोग से लोगों की खुले में शौच करने की प्रवृति व आदत में बदलाव लाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को खुले में शौच के दुष्परिणामों का पता है, अगर खुले में शौच को पूर्ण रूप से बंद किया जाए, तो करीबन 70 प्रतिशत बीमारियों से बचा जा सकता है।
उपायुक्त मंगलवार को श्री माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड परिसर में स्थित सत्संग भवन में स्वच्छ भारत मिशन के तहत आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी एक-एक गांव में जाएं तथा गांव में मोडिवेटर की मदद से ग्रामीणों को खुले में शौच न करने दें तथा उन्हें घर में शौचालय बनवाने व लगातार इसके उपयोग के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यह अभियान काफी महत्वपूर्ण है, इसलिए हमें पूरी तत्परता से इस कार्य को करना है तथा खुले में शौच को बिल्कुल बंद करवाना है। उपायुक्त ने कहा कि देश के कई बड़े जिले खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं तथा पंचकूला जैसे छोटे जिले में खासकर गांवों में यह कार्य मुश्किल नहीं है। अभी पंचायत चुनाव में जो प्रतिनिधि चुने गए हैं, उनकी मदद से गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाया जाए। सुबह के दो घंटे व सायं के एक घंटा गांवों में पहरा देकर किसी को भी खुले में शौच के लिए न जाने दिया जाए।
अतिरिक्त उपायुक्त हेमा शर्मा ने बताया कि जिला मेें 45 दिनों में हर गांव में अधिकारी जाएं तथा लोगों को खुले में शौच न करने दें। महिलाओं के मान-सम्मान व उन्हें शर्मसार होने से बचाने व खतरनाक बीमारियों का प्रकोप न होने देने के लिए हर घर में शौचालय होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में स्वच्छता मोडिवेटर, अधिकारियों, स्कूलों के मुख्याध्यापक व प्रिंसीपल तथा पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देकर इस स्वच्छता अभियान में सभी का पूर्ण सहयोग लिया जाएगा, ताकि हम अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकें।
फीड बैक फाउंडेशन नई दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय सिन्हा ने बताया कि स्वच्छता अभियान की शुरूआत केंद्र सरकार की ओर से 1986 में की गई थी, जिसे बाद में अलग-अलग नाम देते हुए इसे मोडिफाई किया गया। उन्होंने कहा कि देश की 120 करोड़ जनता को पता है कि खुले में शौच बुरी बात है, लेकिन फिर भी लोग खुले में शौच की आदत को नहीं छोड़ पा रहे। खुले में शौच से होने वाले नुकसानों को जानते हुए भी इस आदत को न छोड़ पाना, एक तरह से मानसिक रोग जैसा है। उन्होंने कहा कि बंगाल का नादिया जिला, मध्यप्रदेश का इंदौर जिला व राजस्थान का बीकानेर जिला खुले में शौचमुक्त हो गए हंै। हरियाणा को दूसरे प्रदेशों का मॉडल बनाने के लिए वर्ष 2006 से कार्य किया जा रहा है, जोकि भिवानी से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि लोगों को भी शौचालय निर्माण के लिए सब्सिडी का लालच नहीं करना चाहिए, अपितु अपने समाज व गांवों के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए शौचालय बनवाने चाहिएं। सभी अधिकारी इस अभियान में अपनी पूर्ण आहुति दें तथा इसे जिला में कामयाब बनाएं। इस अवसर पर एसडीएम कालका आशुतोष रंजन, एसडीएम पंचकूला राधिका सिंह, नगराधीश ममता शर्मा, संपदा अधिकारी मनीष लोहान, एसीपी मुनीष सहगल व जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।

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